lekh-junction-header
Editor's ChoiceApna GyaanParenting LifeStyleSuccessful FailureHealthCinema ki GupShupEast Meets WestLekhJunction GlobalCityJustCareerLekhJunction TechJaipur Literature Festival 2025SportsJaipur Literature Festival 2026

Read latest and other stories

Latest Stories

जेन ज़ी , ब्रो आपका कैलिबर बेमिसाल है, जंतर-मंतर पर आपने पढ़ दिया जीत का मंतर

जेन ज़ी , ब्रो आपका कैलिबर बेमिसाल है, जंतर-मंतर पर आपने पढ़ दिया जीत का मंतर

ज़िंदगी में कई बार हमें कुछ ऐसी गलतफहमियां होती हैं, जिनका पता वक्त आने पर चलता है। ऐसी ही गलती मिलेनियम जेनरेशन की जेन जी को लेकर हुई थी। हमें लगता था कि मोबाइल और लैपटॉप को अपनी उंगलियों से स्क्रॉल...

अब शायद हम घरों में नहीं, मकानों में रहने के आदी हो चुके हैं

अब शायद हम घरों में नहीं, मकानों में रहने के आदी हो चुके हैं

घर... वो जगह, जहां इस बड़ी-सी दुनिया में हमारी एक छोटी-सी दुनिया बसती है। जहां लौटने पर सुकून मिलता है। हर कोई अपनी हैसियत के अनुसार अपने घर को सजाता और संवारता है। यहां रहने वाले सभी लोग प्रेम की एक...

फीफा वर्ल्ड कप... यादों, बातों, खुशियों और विवादों की एक झलक

फीफा वर्ल्ड कप... यादों, बातों, खुशियों और विवादों की एक झलक

बहुत सारी यादों और वादों के साथ फीफा वर्ल्ड कप अब खत्म हो गया। इस बार फीफा का सिकंदर स्पेन रहा। स्पेन ने जिस तरह पिछली बार की विजेता टीम अर्जेंटीना के खिलाफ खेला, वह वाकई कमाल था। इसी प्रदर्शन के दम...

Editor's Choice

View All →
जेन ज़ी , ब्रो आपका कैलिबर बेमिसाल है, जंतर-मंतर पर आपने पढ़ दिया जीत का मंतर

जेन ज़ी , ब्रो आपका कैलिबर बेमिसाल है, जंतर-मंतर पर आपने पढ़ दिया जीत का मंतर

ज़िंदगी में कई बार हमें कुछ ऐसी गलतफहमियां होती हैं, जिनका पता वक्त आने पर चलता है। ऐसी ही गलती मिलेनियम जेनरेशन की जेन जी को लेकर हुई थी। हमें लगता था कि मोबाइल और लैपटॉप को अपनी उंगलियों से स्क्रॉल...

अगर आपको भी लगता है कि बुढ़ापे में कौन बनेगा सहारा, तो बैंक में जमा कर लीजिए समय

अगर आपको भी लगता है कि बुढ़ापे में कौन बनेगा सहारा, तो बैंक में जमा कर लीजिए समय

अगर आपको भी लगता है कि बुढ़ापे में कौन बनेगा सहारा, तो बैंक में जमा कर लीजिए समय। यह बात एकदम सोलह आने सच है कि जमाना बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस वक्त के साथ हम सभी बहुत तेजी से भागते चले जा रहे...

तो क्या अब हम अगले ट्विशा जैसे ही किसी केस का इंतजार कर रहे हैं?

तो क्या अब हम अगले ट्विशा जैसे ही किसी केस का इंतजार कर रहे हैं?

इन दिनों देशभर में ट्विशा का केस सुर्खियां बटोर रहा है। ट्विशा शर्मा ने ससुराल की यातनाओं से प्रताड़ित होकर अपनी जान गंवा दी। छह महीने की उसकी शादी में ना जाने क्या हुआ कि उसने मौत को गले लगाना...

Apna Gyaan

View All →
अब शायद हम घरों में नहीं, मकानों में रहने के आदी हो चुके हैं

अब शायद हम घरों में नहीं, मकानों में रहने के आदी हो चुके हैं

घर... वो जगह, जहां इस बड़ी-सी दुनिया में हमारी एक छोटी-सी दुनिया बसती है। जहां लौटने पर सुकून मिलता है। हर कोई अपनी हैसियत के अनुसार अपने घर को सजाता और संवारता है। यहां रहने वाले सभी लोग प्रेम की एक...

क्या वाकई हर जमाना अपने आप में बेस्ट होता है?

क्या वाकई हर जमाना अपने आप में बेस्ट होता है?

हम हमेशा सुनते आए हैं अपने मां-बाप से, अपने दादा-दादी से उनके जमाने के किस्से। हमारे दादा जी के जमाने में तो गांव में बिजली भी नहीं होती थी। वो नदी पार करके स्कूल जाया करते थे। उनका स्कूल और कॉलेज...

तो क्या मिल जाएगा अब कॉरपोरेट मजदूरों को राइट टू डिस्कनेक्ट का अधिकार?

तो क्या मिल जाएगा अब कॉरपोरेट मजदूरों को राइट टू डिस्कनेक्ट का अधिकार?

इंटरनेट और तकनीक की दुनिया ने जहां लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है वहीं एक कर्मचारी के तौर पर इसके क्या दुष्प्रभाव होते हैं वो भी किसी से छिपे हुए नहीं हैं। कॉरपोरेट मजदूर अक्सर ऑफिस से लौटने के बाद...

Parenting

View All →
तो क्या पेरेंट्स से अपनी बात कहने में डर लगता है ?

तो क्या पेरेंट्स से अपनी बात कहने में डर लगता है ?

अगर अभी हम अपने इंटरनेट की फीड की बात करेंगे तो हाई-प्रोफाइल मर्डर केतन अग्रवाल की खबरों से भरी हुई है। केतन को उन्हीं की मंगेतर सिया गोयल ने खाई में धक्का देकर मौत की नींद सुला दिया। हम यहां आपसे...

बच्चों के हाथ में मोबाइल कैसे आया है? इस सवाल का जवाब आप ढूंढें

बच्चों के हाथ में मोबाइल कैसे आया है? इस सवाल का जवाब आप ढूंढें

अगर हम आज के दौर की बात करें तो सारी पेरेंट्स कम्युनिटी इस बात को लेकर परेशान है कि आखिर हम अपने बच्चों से किस तरह से मोबाइल को दूर करें। अगर मोबाइल नहीं होता तो हमारे बच्चे इरिटेट होने लगते हैं।...

तो क्या अब हम पेरेंटिंग में चूक रहे हैं?

तो क्या अब हम पेरेंटिंग में चूक रहे हैं?

अगर हम इस समय की पेरेंटिंग की बात करें तो वो एक अग्निपथ पर चलने जैसा है। बहुत अलग-अलग तरह की पेरेंटिंग की फिलॉसफी हमारे सामने मौजूद है। इसमें शैडो पेरेंटिंग, जेंटल पेरेंटिंग और न जाने कितनी और हमारे...