यह तजुर्बा है जनाब, समझदार इतना कि हमारा बचपन इससे रूठ जाता है
तजुर्बा भी अजीबोगरीब शै है। जैसे-जैसे जिंदगी के रास्तों से गुजरते हुए यह हमारे साथ आता है, अपने पीछे बहुत कुछ छोड़ जाता है और हमसे बहुत कुछ ले भी जाता है। सबसे पहले मासूमियत जाती है, फिर बे-सबब...










